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परिचय
भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच 24 जुलाई 2025 को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA), जिसे व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) भी कहा जाता है, पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए बनाया गया है। भारत के लिए यह समझौता निर्यात, रोजगार सृजन, और पेशेवर गतिशीलता के अवसर प्रदान करता है, साथ ही यूके से कुछ आयात को सस्ता करता है। आइए इस समझौते के मुख्य बिंदुओं और भारत के लिए इसके लाभों को विस्तार से समझें।
भारत-यूके FTA के मुख्य बिंदु
यह समझौता कई महत्वपूर्ण प्रावधानों को शामिल करता है, जिनका विवरण निम्नलिखित है:
1. टैरिफ में कमी:
- भारतीय निर्यात: 99% भारतीय निर्यात को यूके बाजार में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा, जो व्यापार मूल्य का लगभग 100% कवर करता है। इससे टेक्सटाइल, रत्न, और समुद्री उत्पादों जैसे क्षेत्रों को काफी बढ़ावा मिलेगा।
- यूके निर्यात: भारत में 90% यूके उत्पादों पर टैरिफ कम किए जाएंगे, औसत टैरिफ 15% से घटकर 3% हो जाएगा। विशिष्ट क्षेत्रों में शामिल हैं:
- व्हिस्की और जिन: टैरिफ 150% से घटकर 75% हो जाएंगे, और 10 वर्षों में 40% तक कम होंगे।
- कारें: टैरिफ 100% से अधिक से घटकर 10% तक आएंगे (कोटा सिस्टम के तहत)।
- एयरोस्पेस और इलेक्ट्रिकल मशीनरी: टैरिफ समाप्त या कम किए जाएंगे, जिसमें एयरोस्पेस पर 11% तक की कटौती होगी।
- यह प्रावधान दोनों पक्षों के निर्यातकों के लिए व्यापार को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
2. डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (DCC):
- लगभग 75,000 भारतीय कर्मचारी, जो यूके में अल्पकालिक असाइनमेंट पर हैं, उन्हें 3 वर्षों तक यूके के सामाजिक सुरक्षा योगदान से छूट मिलेगी। वे केवल भारत के सामाजिक सुरक्षा सिस्टम में योगदान देंगे, जिससे यूके में काम करने वाली भारतीय फर्मों के लिए लागत कम होगी।
3. सेवा क्षेत्र:
- भारतीय आईटी, आईटी-सक्षम सेवाओं, बैंकिंग, वित्त, पेशेवर परामर्श, और शिक्षा क्षेत्रों को यूके बाजार में बढ़ा हुआ प्रवेश मिलेगा।
- यूके ने भारतीय पेशेवर योग्यताओं (कानून और लेखा में) को मान्यता दी है, हालांकि कानूनी सेवाएं इसमें शामिल नहीं हैं।
- भारतीय पेशेवरों जैसे आर्किटेक्ट, इंजीनियर, शेफ, योग प्रशिक्षक, और संगीतकारों के लिए सरलीकृत वीजा प्रक्रियाएं और उदार प्रवेश श्रेणियां होंगी।
4. सरकारी खरीद:
- यूके की कंपनियों को भारत के सरकारी खरीद बाजार (मूल्य INR 4 ट्रिलियन, यानी ~US$46.3 बिलियन) में प्रवेश मिलेगा, जिसमें सामान, सेवाएं, और बुनियादी ढांचा अनुबंध शामिल हैं। इससे भारतीय और यूके व्यवसायों के बीच संयुक्त उद्यम और हाइब्रिड आपूर्ति श्रृंखलाओं को बढ़ावा मिलेगा।
5. डिजिटल व्यापार और सीमा शुल्क:
- पेपरलेस व्यापार और इलेक्ट्रॉनिक अनुबंधों के लिए प्रावधान, जो व्यापार प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करेंगे।
- भारत ने सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को अंग्रेजी में ऑनलाइन प्रकाशित करने और सामानों को जल्दी रिलीज करने का वचन दिया है, जिससे व्यापार दक्षता बढ़ेगी।
6. नए अध्याय:
- पहली बार, भारत ने भ्रष्टाचार-निरोध, उपभोक्ता संरक्षण, श्रम अधिकार, लैंगिक समानता, और विकास पर अध्याय शामिल किए हैं, जो पारंपरिक व्यापार से परे एक व्यापक दायरे को दर्शाते हैं।
7. रणनीतिक सहयोग:
- भारत-यूके विजन 2035 योजना के तहत रक्षा, शिक्षा, जलवायु, प्रौद्योगिकी, और नवाचार में सहयोग बढ़ेगा।
- आपराधिक रिकॉर्ड साझा करने और संगठित अपराध, अवैध प्रवास के खिलाफ संयुक्त प्रयासों के लिए समझौते शामिल हैं।
8. अपवाद:
- डेयरी, सेब, अखरोट, व्हे, ब्लू-वेइन्ड चीज़, सोने की छड़ें, और स्मार्टफोन जैसे संवेदनशील कृषि उत्पादों पर टैरिफ रियायतें नहीं दी गई हैं।
- इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड, और हाइड्रोजन-संचालित वाहनों के लिए पहले 5 वर्षों तक कोई शुल्क रियायत नहीं होगी।
भारत के लिए लाभ
यह FTA भारत के लिए कई लाभ प्रदान करने की संभावना रखता है, जिनका विवरण निम्नलिखित है:
1. निर्यात वृद्धि:
- 99% शुल्क-मुक्त प्रवेश से भारतीय निर्यात में वृद्धि होगी, विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे टेक्सटाइल, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, खेल सामान, खिलौने, रत्न, आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, और ऑटो पार्ट्स में।
- समुद्री निर्यात जैसे झींगा और टूना को यूके के $5.4 बिलियन समुद्री खाद्य आयात बाजार से लाभ होगा।
- रत्न और आभूषण निर्यात, जो वर्तमान में $941 मिलियन हैं, 2-3 वर्षों में दोगुना हो सकते हैं, क्योंकि यूके का $3 बिलियन आभूषण बाजार खुल जाएगा।
- प्लास्टिक निर्यात (फिल्म, शीट, पाइप, रसोई के सामान) 15% की वृद्धि के साथ $186.97 मिलियन तक पहुंच सकते हैं।
2. रोजगार सृजन:
- श्रम-प्रधान क्षेत्रों में टैरिफ समाप्ति से आगरा, कानपुर, कोल्हापुर, और चेन्नई जैसे MSME हब में रोजगार बढ़ेगा।
- कांचीपुरम, भागलपुर, जयपुर, और वाराणसी जैसे क्षेत्रों की महिला कारीगरों, साथ ही कोल्हापुरी चप्पल निर्माताओं को प्रीमियम यूके बाजार में प्रवेश मिलेगा, जिससे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।
3. सस्ता आयात:
- ब्रिटिश उत्पाद जैसे ऑटोमोबाइल, हेल्थकेयर उपकरण, सॉफ्ट ड्रिंक, कॉस्मेटिक्स, व्हिस्की, और चॉकलेट भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सस्ते होंगे, क्योंकि टैरिफ 15% से घटकर 3% हो जाएंगे।
- इससे घरेलू खपत बढ़ेगी और भारतीय उद्योगों को उन्नत विनिर्माण घटक कम लागत पर मिलेंगे।
4. पेशेवर गतिशीलता:
- सरलीकृत वीजा प्रक्रियाएं और DCC के तहत सामाजिक सुरक्षा छूट से भारतीय पेशेवरों के लिए यूके में काम करना आसान होगा, जिससे सेवा कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
- यह समझौता 75,000 भारतीय कर्मचारियों को कवर करता है, जिससे व्यापार करने की लागत कम होगी और यूके बाजार में विस्तार आसान होगा।
5. फार्मा और आईटी क्षेत्र:
- जेनेरिक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों (जैसे ECG, X-ray मशीनें) पर शून्य टैरिफ से भारतीय फार्मा कंपनियां यूके बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी होंगी।
- आईटी और डिजिटल सेवाओं के लिए बढ़ा हुआ प्रवेश भारत के डिजिटल निर्यात को बढ़ावा देगा।
6. कृषि निर्यात:
- अंगूर, आम, और प्रसंस्कृत खाद्य जैसे कृषि निर्यात 3 वर्षों में 20% बढ़ सकते हैं, क्योंकि 95% से अधिक कृषि उत्पादों पर शुल्क समाप्त हो जाएंगे।
- आंध्र प्रदेश, ओडिशा, केरल, और तमिलनाडु जैसे तटीय राज्यों को इससे काफी लाभ होगा।
- कॉफी, चाय, और मसालों जैसे प्रीमियम ब्रांडेड उत्पादों को उच्च-स्तरीय यूके बाजार में प्रतिस्पर्धी लाभ मिलेगा।
7. रणनीतिक और आर्थिक लाभ:
- यह FTA भारत की वैश्विक व्यापार स्थिति को मजबूत करता है, जो RCEP से बाहर निकलने के बाद पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं के साथ उच्च-स्तरीय सौदों की ओर बढ़ रहा है।
- द्विपक्षीय व्यापार, जो वर्तमान में $56 बिलियन है, 2030 तक $112 बिलियन तक दोगुना हो सकता है।
- यह यूएस और ईयू के साथ भविष्य के FTA के लिए एक टेम्पलेट के रूप में काम करेगा।
8. निवेश के अवसर:
- यूके से £6 बिलियन के नए निवेश और निर्यात जीत से भारतीय अर्थव्यवस्था में रोजगार और वृद्धि होगी।
- भारतीय फर्मों को यूके के सार्वजनिक खरीद पारिस्थितिकी तंत्र में विस्तार करने के अवसर मिलेंगे, जिससे उनकी वैश्विक पहुंच बढ़ेगी।
निष्कर्ष और प्रभाव
भारत-यूके FTA भारत के लिए एक परिवर्तनकारी कदम प्रतीत होता है, जो निर्यात, रोजगार सृजन, और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देगा। शुल्क-मुक्त प्रवेश, पेशेवर गतिशीलता, और सस्ता आयात व्यवसायों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ पहुंचाएंगे। हालांकि डेयरी और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे अपवाद कुछ विवाद पैदा कर सकते हैं, कुल मिलाकर प्रभाव सकारात्मक प्रतीत होता है। यह समझौता न केवल द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखता है, बल्कि भारत को वैश्विक व्यापार में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करता है, जो विजन 2035 के तहत रणनीतिक सहयोग द्वारा समर्थित है।
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